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आँकड़ों के पीछे की कहानियाँ

2024 की बिजली माँग: 4.3% वृद्धि का क्या अर्थ है?

IEA की Global Energy Review 2025 के अनुसार 2024 में विश्व बिजली माँग, 2023 की तुलना में 4.3% बढ़ी। यह माँगी गई बिजली की मात्रा में बदलाव है, किसी खास ऊर्जा स्रोत की हिस्सेदारी में नहीं।

संपादकीय समीक्षा

IEA के अनुसार, 2023 से 2024 के बीच वैश्विक बिजली की माँग कितने प्रतिशत बढ़ी?

उत्तर और व्याख्या: 4.3 %

4.3% बढ़ी। यह पिछले वर्ष की माँग के सापेक्ष वृद्धि है, किसी हिस्सेदारी में प्रतिशत अंकों का बदलाव नहीं।

आँकड़े का संदर्भ वर्ष: 2024

IEA · Global Energy Review 2025

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IEA के अनुसार, 2023 से 2024 के बीच वैश्विक बिजली की माँग कितने प्रतिशत बढ़ी?

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उत्तर और व्याख्या

4.3 %

4.3% बढ़ी। यह पिछले वर्ष की माँग के सापेक्ष वृद्धि है, किसी हिस्सेदारी में प्रतिशत अंकों का बदलाव नहीं।

पिछला वर्ष गणना का आधार है

वृद्धि दर निकालने के लिए नए वर्ष की माँग से पिछले वर्ष की माँग घटाएँ, पिछले वर्ष की माँग से भाग दें और 100 से गुणा करें। एक उदाहरणात्मक सूचकांक में 2023 को 100 रखने पर 2024 का मान 104.3 होगा। ये सूचकांक के मान हैं, किलोवाट-घंटे में वास्तविक माप नहीं।

प्रतिशत और प्रतिशत अंक

प्रतिशत अंकों का बदलाव दो प्रतिशतों को घटाने से मिलता है। एक अलग काल्पनिक उदाहरण में हिस्सेदारी 10% से 12% हो तो वृद्धि 2 प्रतिशत अंक है, या शुरुआती मान के सापेक्ष 20%। IEA का 4.3% भी सापेक्ष वृद्धि दर है: इसमें दो हिस्सेदारियाँ घटाने के बजाय बिजली की मात्रा की पिछले वर्ष से तुलना होती है।

वृद्धि क्या नहीं बताती?

IEA अत्यधिक गर्मी में शीतलन, उद्योग, परिवहन का विद्युतीकरण और डेटा केंद्रों जैसे कारण बताता है। वैश्विक दर का अर्थ नहीं कि हर देश या घर ने 4.3% अधिक बिजली इस्तेमाल की। न ही इसका अर्थ है कि बिजली के बिल या उत्सर्जन उतने ही प्रतिशत बढ़े: कीमतें, उत्पादन स्रोतों का मिश्रण और अन्य कारण भी महत्वपूर्ण हैं।

हमेशा तुलना का आधार बताएँ: 2024 की विश्व बिजली माँग, 2023 के मुकाबले 4.3% अधिक थी।

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